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कर किरपा तेरे गुण गावा || Kar Kirpa tere gun gava

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कर किरपा तेरे गुण गावा, नानक नाम जपत सुख पावा, तू वड दाता अन्तर्यामी, सब मे हैं रविया पुरण प्रभ स्वामी, कर किरपा तेरे गुण गावा मेरे प्रभ प्रीतम प्राण अधारा, हॅव सूंड़-सूंड़ जीवा नाम तुमारा, कर किरपा तेरे गुण गावा तेरी शरण मेरे सतगुुरु मेरे पूरे, मन निर्मल होये संता दूरे, कर किरपा तेरे गुण गावा चरण कमल हिर्दय उरधारे, तेरे दर्शन कऊ जाई बल्हारे, कर किरपा तेरे गुण गावा कर कृपा तेरे गुण गावा, नानक नाम जपत सुख पावा, कर किरपा तेरे गुण गावा

May 11, 2022 / 0 Comments
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कोई बोलै राम राम कोई खुदाए || Koi bole ram ram koi khudaye

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कोई बोलै राम राम कोई खुदाए कोई सेवै गुसईआ कोई अलाहि कोई बोलै राम राम कोई खुदाए कोई सेवै गुसईआ कोई अलाहि ..x2 कारण करण, करण करीम किरपा धार, धार रहीम ..x2 कोई बोलै राम राम, कोई खुदाए कोई सेवै गुसईआ, कोई अलाहि ..x4 कोई नावै तीरथ, कोई हज जाए कोई करै पूजा, कोई सिर निवाए ..x2 कोई करै पूजा, कोई सिर निवाए कोई बोलै राम राम, कोई खुदाए कोई सेवै गुसईआ, कोई अलाहि ..x4 कोई पड़ै बेद, कोई कतेब कोई ओढै नील, कोई सुपेद ..x2 कोई ओढै नील, कोई सुपेद कोई बोलै राम राम, कोई खुदाए कोई सेवै गुसईआ, कोई अलाहि ..x4 कोई कहै तुरक, कोई कहै हिंदू कोई बाछै भिस्त, कोई सुरगिंदू ..x2 कोई बाछै भिस्त, कोई सुरगिंदू कोई बोलै राम राम, कोई खुदाए कोई सेवै गुसईआ कोई अलाहि ..x4 कहु नानक जिन, हुकम पछाता प्रभ साहिब का, तिन भेद जाता ..x2 प्रभ साहिब का, तिन भेद जाता कोई बोलै राम राम कोई खुदाए कोई सेवै गुसईआ कोई अलाहि ..x4 कारण करण करीम ॥ किरपा धार रहीम ॥१॥ रहाउ ॥ कोई बोलै राम राम कोई खुदाए ॥ कोई सेवै गुसईआ कोई अलाहि ॥१॥

May 11, 2022 / 0 Comments
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जैन धर्म का इतिहास || History of jainism

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जैन धर्म को भारत के प्राचीन धर्मों में से एक माना जाता है। जैन ग्रंथों के अनुसार यह धर्म अनंतकाल से माना जाता रहा है, हालाँकि यह जनमानस में बड़े स्तर पर महावीर स्वामी के बाद फैलता नज़र आता है। जैन शब्द को ‘जिन’ शब्द से निकला हुआ माना जाता है। जिन’ शब्द ‘जि’ धातु से निकला है जिसका अर्थ है जीतना। इस धर्म की परंपरा का निर्वाह तीर्थंकरों के माध्यम से होता हुआ आज के स्वरूप तक पहुँचा है। जैन धर्म में 24 तिर्थंकर हुए। जिसमें से पहले थे ऋषभदेव तथा अंतिम महावीर स्वामी। इस धर्म की प्राचीनता को सिद्ध करते हुए ऋषभदेव को राजा भरत का पिता तक माना जाता है। जैन धर्म अपने साहित्यिक पक्ष का भी धनी रहा है जो इसकी प्राचीनता को पुष्ट करता है। यह धर्म ‘अहिंसा’ के सिद्धांत को बहुत ही सख़्ती से मानता है। इस धर्म के दो प्रमुख सम्प्रदाय हैं – ‘दिगम्बर‘ और ‘श्वेतांबर‘। जैनियों के धार्मिक स्थल को जिनालय कहा जाता है। जैन बिलो के अनुसार वस्तु का स्वाभाव समझा जाता है, इसलिए जब से सृष्टि है तब से धर्म है, और जब तक सृष्टि है, तब तक धर्म रहेगा, अर्थात् जैन धर्म सदा से अस्तित्व में था और सदा रहेगा। इतिहासकारो द्वारा जैन धर्म का मूल भी सिंधु घाटी सभ्यता से जोड़ा जाता है जो हिन्द आर्य प्रवास से पूर्व की देशी आध्यात्मिकता को दर्शाता है। सिन्धु घाटी से मिले जैन शिलालेख भी जैन धर्म के सबसे प्राचीन धर्म होने की पुष्टि करते है।अन्य शोधार्थियों के अनुसार श्रमण परम्परा ऐतिहासिक वैदिक धर्म के हिन्द-आर्य प्रथाओं के साथ समकालीन और पृथक हुआ।जैन ग्रंथो के अनुसार वर्तमान में प्रचलित जैन धर्म भगवान आदिनाथ के समय से प्रचलन में आया। यहीं से जो तीर्थंकर परम्परा प्रारम्भ हुयी वह भगवान महावीर या वर्धमान तक चलती रही जिन्होंने ईसा से ५२७ वर्ष पूर्व निर्वाण प्राप्त किया था। उनके अनुसार यह धर्म बौद्ध धर्म के पीछे उसी के कुछ तत्वों को लेकर और उनमें कुछ ब्राह्मण धर्म की शैली मिलाकर खडा़ किया गया।

May 11, 2022 / 0 Comments
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बौद्ध धर्म का इतिहास और रोचक जानकारिया || History and interesting facts of Buddhism

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भारत में कई धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं. जिसमें बौद्ध धर्म के अनुयायी भी शामिल हैं. बौद्ध धर्म एक प्राचीन भारतीय धर्म (Indian Religion) है और आज के समय में दुनिया के प्रमुख धर्मों में से एक है. यह भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और दर्शन है. बौद्ध धर्म (Buddhism) की स्थापना तथागत भगवान बुद्ध  ने करीब 2600 वर्ष पहले की थी. बौद्ध धर्म को मानने वाले ज्यादातर चीन, जापान, कोरिया, थाईलैंड, कंबोडिया, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और भारत जैसे कई देशों में रहते हैं| बौद्ध धर्म के बारे में कुछ महत्वपूर्ण और रोचक जानकारिया – 1. बुद्ध की जन्म-मृत्यु “ईसा पूर्व 536 – ईसा पूर्व 483” मानी जाती है. हाल ही में हुए शोध से पता चला है कि बुद्ध का जन्म प्रचलित जन्म वर्ष से करीब एक सदी पहले हुआ था, “ईसा पूर्व 623 – ईसा पूर्व 543” को बुद्ध का जीवनकाल माना जाता है. 2. गौतम बुद्ध की मृत्यु के बाद बुद्ध के शरीर के अवशेषों को आठ भागों में बांट कर उन पर आठ स्तूपों का निर्माण कराया गया. 3. बुद्ध का असली नाम सिद्धार्थ गौतम था. “बुद्ध” एक सम्मान जनक उपाधि है यह कोई व्यक्तिगत नाम नहीं है. इसका अर्थ है “जागृत व्यक्ति.” 4. बौद्ध धर्म में कोई एक केंद्रीय ग्रंथ नहीं है. बौद्ध धर्म के अनेक ग्रंथ है, जिन्हें कोई भी व्यक्ति अपने संपूर्ण जीवन काल में नहीं पढ़ सकता. बौद्ध ग्रंथों में सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ “त्रिपिटक” को माना जाता है. 5. बुद्ध का जन्म नेपाल के लुम्बिनी में वेसाक पूर्णिमा के दिन एक बगीचे में हुआ था. 6.. बौद्ध धर्म में अन्य धार्मिक प्रथाओं की तरह, किसी व्यक्ति को एक निर्माता, ईश्वर या देवताओं में विश्वास करने की आवश्यकता नहीं होती. तीन मौलिक अवधारणाओं में बौद्ध धर्म विश्वास करता है. 1. कुछ भी स्थायी नहीं है. 2. सभी कार्यों के परिणाम होते हैं. 3. इसे बदलना संभव है. 7.आधिकारिक तौर पर दुनिया के छ: देश बौद्ध राष्ट्र हैं. भूटान, कंबोडिया, श्रीलंका, थाईलैंड, लाओस और म्यांमार. वहीं मंगोलिया, काल्मिकिया और चीन दुनिया में वे देश हैं जो आधिकारिक तौर पर बौद्ध राष्ट्र नहीं है लेकिन बौद्ध धर्म को समर्थन करते हैं. और उसका प्रचार प्रसार करते हैं. 8. वैज्ञानिकों ने जब बौद्ध भिक्षुओं के मस्तिष्क का अध्ययन किया, तो पाया कि ध्यान ने भिक्षुओं के मस्तिष्क की तरंगों को इस तरह से बदल दिया जिससे खुशी और लचीलेपन की भावना कई गुना बढ़ गईं. 9. बुद्ध की प्रथम मूर्ति मथुरा कला के अंतर्गत बनी थी. वहीं सर्वाधिक बुद्ध की मूर्तियों का निर्माण गंधार शैली के अंतर्गत किया गया था. 10. दुनिया का पहला विश्व धर्म होने के साथ ही बौद्ध धर्म पहला प्रचारक धर्म भी था जो अपने मूल स्थान से दूर-दूर तक पूरी दुनिया में फैला था.

May 6, 2022 / 0 Comments
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जामा मस्जिद का इतिहास || History of Jama masjid

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शाहजहां, अकबर के पोते ने 1656 में प्रचलित छद्म-इटालियन शैली को अस्वीकृत कर दिया। विशाल मस्जिद, जिसे मस्जिद-ए-जहांनुमा के रूप में भी जाना जाता है, (जिसका मतलब है दुनिया का दर्शन)। मुगल वास्तुशिल्प कौशल को दर्शाते हुए यह अपनी दो मीनारों और तीन विशाल गुंबदों के साथ मजबूती से यह दिल्ली में लाल किले के सामने खड़ा है। 25,000 लोग यहाँ के आंगन में अच्छी तरह से 76 x 66 मीटर के आयाम में खड़े हो सकते हैं और अपनी नमाज़ अदा कर सकते है|इसे व्यापक हिंदू और मुस्लिम वास्तुकला तकनीक से तैयार किया गया है विभिन्न ऊँचाइयों के लगभग 15 गुंबदों को बनाए रखने के लिये 260 स्तंभों का प्रयोग किया गया है जो मस्जिद की भव्यता को बढ़ाते है। मस्जिद के दरवाजे क्रमशः 35,39,33 पूर्वी, उत्तरी, दक्षिणी ओर है। दक्षिणी छोर में एक मदरसा था, लेकिन 1857 के विद्रोह में इसे नष्ट कर दिया। पूरे मस्जिद 261 फीट x 90 फीट है, इसके आँगन में एक प्रार्थना स्थल है और मस्जिद का फर्श सफेद और काले पत्थरों के वैकल्पिक पट्टियों से बना है। मुस्लिमों के लिये प्रार्थना स्थल को कालीन से सजावट किया है। 2006 के ब्लास्ट से जामा मस्जिद के भीतर मुसलमानों के मन में जबरदस्त डर पैदा कर दिया। यह शुक्रवार का दिन था, यह एक ऐसा दिन जिसमें अल्लाह ने मस्जिद को बचाया लिया और यह दिल्ली शहर के लोगों के दिलों में सुंदर रूप से आज भी खड़ा है।

May 5, 2022 / 0 Comments
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हाजी अली दरगाह का इतिहास || History of haji ali dargah

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शहर के मध्य में स्थित ये पवित्र दरगाह मुंबई की मान्यता प्राप्त सरहद है। सुन्नी समूह के बरेलवी संप्रदाय द्वारा इस मंदिर की देखरेख की जाती है। यहां हर धर्म के लोग आकर अपनी मनोकामना का धागा बांधकर जाते हैं। उन्हें यह उम्मीद होती है कि यहां मांगी गई मुराद जरूर पूरी होती है। यह दरगाह वर्ली की खाड़ी से 500 गज की दूरी पर समुद्र में एक छोटे द्वीप पर स्थित है। यह शहर की सीमा महालक्ष्मी से एक संकरे सेतुमार्ग द्वारा जुड़ा है। इस पुल में कोई रेलिंग नहीं है किंतु ज्वार के आने पर रस्सी बांध दी जाती है। इसलिए दरगाह तक तभी जाया जा सकता है जबकि समुद्र का जलस्तर कम हो। यह 500 गज की यात्रा जिसके दोनों तरफ समुद्र हो यहां की यात्रा की मुख्य आकर्षण है। हाजी अली की दरगाह की स्थापना 1631 ई में की गयी थी । इसका निर्माण हाजी उसमान रनजीकर, जो तीर्थयात्रियों को मक्का ले जाने वाले जहाज के मालिक थे, ने कराया था। समुद्री नमकीन हवाओं के कारण इस इमारत को काफी नुकसान हुआ है। सन 1960 में आखिरी बार दरगाह का सुधार कार्य हुआ था। सुन्नी समुदाय के लोग इस मजार की देख-रेख करते हैं। ऐसा माना जाता है कि हाजी अली शाह बुखारी के निधन के पश्चात उनकी बहन ने उनके अधूरे स्वप्न को पूरा करने का बीड़ा उठा लिया था। वह भी इस्लाम के प्रसार-प्रचार में लीन हो गई थीं। वर्ली की खाड़ी से कुछ दूरी पर उनका मकबरा भी स्थित है। हाजी अली की यह दरगाह 4500 वर्ग मीटर तक फैली हुई है, जिसमें 85 फीट ऊंचा मीनार स्थित है। दरगाह के मुख्य भाग तक पहुंचने से पहले काफी लंबा मार्ग तय करना होता है। दरगाह के भीतर हाजी अली शाह बुखारी का मकबरा लाल और हरे रंग की चादर से ढका रहता है। यह दरगाह करीब 400 साल पुरानी है, जिसकी कई बार मरम्मत की जा चुकी है। मुख्य परिसर में पहुंचने पर आपको रंगीन कांच की नक्काशी से लैस स्तंभ नजर आएंगे, जिन पर अल्लाह के 99 नाम लिखे हुए हैं। इसके अलावा इस दरगाह के चारों ओर चांदी के खंबों का दायरा बना हुआ है, जो बेहद खूबसूरत हैं। अन्य दरगाहों की तरह यहां भी महिलाओं और पुरुषों के प्रार्थना करने के लिए अलग-अलग स्थान हैं। कुल-मिलाकर यह कहा जा सकता है कि हाजी अली शाह बुखारी की दरगाह मुस्लिम नक्काशी और कलाकारी का एक आकर्षक नमूना है। दरगाह तक पहुंचने के लिए जिस मार्ग को तय करना होता है वह दुकानों से भरा है, जहां आपको दरगाह पर चढ़ाने वाली चादर से लेकर फूल और अन्य सभी समान उपलब्ध हो जाएंगे। प्रत्येक आगंतुक मस्जिद में प्रवेश से पहले अपने जूते निकालते हैं।सप्ताह के प्रत्येक शुक्रवार को हाजी अली की दरगाह पर सूफी संगीत और कव्वाली की महफिल सजती है। आंकड़ों के अनुसार बृहस्पतिवार और शुक्रवार को यहां धर्मों के बंधन से मुक्त करीब 50 हजार से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिनमें देश-विदेश से आए पर्यटक भी शामिल हैं।

May 5, 2022 / 0 Comments
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खुल जायेंगी किताबे || Khul jaayengi kitabe bhajan lyrics

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खुल जायेंगी किताबे जब भी हिसाब होगा इंसाफ का तराजू येशु के हाथ होगा…….. 2 खुल जायेंगी किताबे जो भी तू कर रहा है येशु वो देखता है……. 2 हर पल का तुझको इंसा…… 2 देना हिसाब होगा इंसाफ का तराजू येशु के हाथ होगा खुल जायेंगी किताबे जब भी हिसाब होगा इंसाफ का तराजू येशु के हाथ होगा आजा अभी भी मुड़कर येशु भुला रहा ही……. 2 वरना ये याद करले……. 2 तेरा ही नाश होगा इंसाफ का तराजू येशु के हाथ होगा खुल जायेंगी किताबे जब भी हिसाब होगा इंसाफ का तराजू येशु के हाथ होगा…….. 2 खुल जायेंगी किताबे

April 27, 2022 / 0 Comments
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अच्चुतम केशवम् || Achchutam keshavam bhajan lyrics

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अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम । कौन कहता हे भगवान आते नहीं, तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं । अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम । कौन कहता है भगवान खाते नहीं, बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं । अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम । कौन कहता है भगवान सोते नहीं, माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं । अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम । कौन कहता है भगवान नाचते नहीं, गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं । अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम । नाम जपते चलो काम करते चलो, हर समय कृष्ण का ध्यान करते चलो । अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम । याद आएगी उनको कभी ना कभी, कृष्ण दर्शन तो देंगे कभी ना कभी । अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम ।

April 27, 2022 / 0 Comments
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रहम नज़र साईं भजन || Raham nazar sai bhajan lyrics

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ना मांगू दुआ, ना चाहूँ मेहर, ना मांगू दुआ, ना चाहूँ मेहर, बस तेरा करम हो शामों शहर। ना मांगू दुआ, ना चाहूँ मेहर बस तेरा करम हो शामों शहर। राही को दिखाए राह गुजर, बस एक नज़र तेरी एक नज़र। रहम नज़र साई रहम नज़र रहम नज़र साई रहम नज़र रहम नज़र साई रहम नज़र बाँधी तूने सर पर कफनी, बाँधी तूने सर पर कफनी, तन पर पहना है झोला, कोई फ़क़ीर है मस्त ये मौला, या बैरागी भोला। कहाँ से आये जाये किधर, कहाँ से आये जाये किधर, ये तो है अमन की एक लहर। राही को दिखाए राह गुजर, बस एक नज़र तेरी एक नज़र। रहम नज़र साई रहम नज़र रहम नज़र साई रहम नज़र रहम नज़र साई रहम नज़र बन्दे हैं हम सारे उसके, बन्दे हैं हम सारे उसके, सबका मालिक एक, श्रद्धा और सबुरी रखकर काम किये जा नेक। कोई भी राह, कोई भी सफर, कोई भी राह, कोई भी सफर, उस तक पहुंचे हर एक डगर। राही को दिखाए राह गुजर, बस एक नज़र तेरी एक नज़र। रहम नज़र साईं रहम नज़र, रहम नज़र साईं रहम नज़र, रहम नज़र साईं रहम नज़र।

April 26, 2022 / 0 Comments
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संभाल प्रभु जी के बोल हिंदी में || Lyrics of sambhal prabhu ji

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संभाल प्रभु जी जीवन के हर पल में अभी तक हमको संभाला तूने आगे भी अगुवाई कर जैसा मुर्गी बच्चों को पंखो तले छिपाती – 2 वैसे ही तेरी छाया बना है शरणस्थान संभाल… सनातन के यहोवा तू ही हमारा बल है – 2 तेरे वचन से हमारे जीवन में ज्योति आई संभाल … वायदा ये तूने किया छोड़े न कभी मुझे – 2 खींचा है रूप मेरा हथेली पर अपनी, संभाल… संभाल … है यीशु तेरा ये प्यार वर्णन से है ये अपार – 2 हाथों से हाथ मिलाया आसमानी बाप से हमारा संभाल…

April 26, 2022 / 0 Comments
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