15 अक्टूबर से पूरे देश में नवरात्रि की धूम है। लोग मां दूर्गा की भक्ति में पूरी तरह से मग्न हैं। डांडिया और गर्बा के मजे सभी उठा रहे हैं। 24 अक्टूबर को इस 10 दिन के पर्व का रावण दहन के साथ समापन होगा। ऐसे में दशहरा कई मायनों में जरूरी हो जाता हैं। पहले तो इसी दिन व्रती अपना व्रत खोलते हैं, मां को अगले साल का न्योता देकर इसी दिन विदाई दी जाती है और घरों में स्थापित कलश को भी इसी दिन विसर्जित किया जाता है। वैसे तो मां अपने भक्तों पर खुशियों की बारिश करती हैं और खुलकर उनपर आर्शीवाद लुटाती हैं। लेकिन इस साल शनि महाराज, भगवान सूर्य और चंदा मामा भी आपकी जिंदगी में खुशियों की लहर लेकर आ सकते हैं। इन राशि वाले लोगों के लिए शुभ संकेत हैं। # दशहरा पर बन रहें हैं ये राजयोग: ज्योतिषाचार्यों की माने तो इस साल विजया दश्मी के दिन 30 सालों बाद खास तरह का महासंयोग बन रहा है। सबसे पहले तो शनि अपने मूल त्रिकोण राशि कुंभ में है, जिससे शश नाम का रोजयोग बन रहा है। दूसरी तरफ सूर्य और बुध तुला राशि में हैं जिससे बुधादित्य योग बन रहा है। साथ ही चंद्रमा और शुक्र एक-दूसरे के ठीक सामने है जिससे धन योग बन रहा है। ऐसे में इन 5 राशि वाले मालामाल हो सकते हैं। # इन राशियों के लिए हैं शुभ संकेत: – कर्क राशि: दशहरा पर कर्क राशि वालों के लिए धन संबंधी अच्छा योग बन रहा है।आप इस शुभ संयोग में इंवेस्ट कर सकते हैं, आपको अच्छा मुनाफा होगा। साथ ही आपके धन में वुद्धि होने की संभावना है। कार्य क्षेत्र में भी आपको सफलता मिल सकती हैं। – वृषभ राशि: वृषभ राशि के लोगों के लिए भी दशहरा का दिन अति शुभ है। इस दिन आपको धन लाभ के साथ पुराने रुके हुए धन की प्राप्ति होने की भी संभावना है। इसके सिवा आपका लव लाइफ भी बेहतर होगा। आपके घर परिवार में सुख-समृद्धि आएगी। – मकर राशि: मकर राशि वाले लोगों की भी आर्थिक स्थिति सुधर सकती है। आपको नौकरी में बदलाव करने का बेहतर ऑप्शन मिल सकता है। पुराना रुका हुआ धन प्राप्त होगा। – तुला राशि: अगर आपका किसी प्रकार का बिजनेस है तो आपको अच्छा मुनाफा होने के साथ धन लाभ के भी योग है। आपका पुराना विवाद खत्म हो सकता है। परिवार में खुशहाली बनी रहेगी। साथ ही आपको जीवनसाथी का साथ भी मिलेगा। – कुंभ राशि: इन खास राजयोगों से आपके जीवन में अद्भुत बदलाव आ सकते हैं। जीवन में खुशहाली बनी रहेगी। पुराने रुके कई जरूरी काम बन सकते हैं। बिजनेस में भी अच्छा लाभ होगा। साथ ही आप नया काम शुरू कर सकते हैं। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है।) ये खास राजयोग बन रहा है दशहरे पर, इन राशियों के लिए हैं शुभ संकेत – This special rajyoga is being formed on dussehra, there are auspicious signs for these zodiac signs
यीशु द्वारा लाज़र को मृतकों में से जीवित करने की कहानी – Story of jesus raises lazarus from the dead
यीशु द्वारा लाज़र को मृतकों में से जीवित करने की कहानी यीशु मसीह द्वारा किए गए सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण चमत्कारों में से एक है, जैसा कि बाइबिल के नए नियम में, विशेष रूप से जॉन के सुसमाचार, अध्याय 11 में दर्ज किया गया है। इस कहानी की घटनाएँ बेथनी शहर में घटित होती हैं, जो यरूशलेम के पास स्थित है। लाजर, उसकी बहनें मरियम और मार्था और यीशु के बीच घनिष्ठ मित्रता थी। लाजर, जिसे मैरी और मार्था का भाई बताया जाता है, गंभीर रूप से बीमार पड़ जाता है। उनकी बहनें यीशु को एक संदेश भेजती हैं, उन्हें अपने भाई की स्थिति के बारे में बताती हैं और उनकी उपस्थिति का अनुरोध करती हैं। संदेश प्राप्त करने पर, यीशु ने जानबूझकर बेथनी की अपनी यात्रा को दो दिनों के लिए विलंबित कर दिया। जब तक वह आता है, लाजर पहले ही मर चुका है, और वह चार दिनों से कब्र में है। जब मार्था सुनती है कि यीशु आ रहे हैं, तो वह उससे मिलने के लिए बाहर जाती है। वह यीशु में अपना विश्वास व्यक्त करती है और स्वीकार करती है कि यदि वह पहले मौजूद होता, तो लाजर की मृत्यु नहीं होती। यीशु ने मार्था को आश्वासन दिया कि लाजर फिर से उठेगा। मार्था भविष्य के पुनरुत्थान में विश्वास करती है लेकिन यीशु की शक्ति की सीमा को पूरी तरह से नहीं समझती है। मैरी, लाजर की दूसरी बहन भी यीशु से मिलने जाती है और लाजर की मृत्यु पर अपना दुख व्यक्त करते हुए, आंसुओं में उनके पैरों पर गिर जाती है। यीशु उपस्थित लोगों के दुःख और लाजर की मृत्यु के कारण हुए दुःख से बहुत प्रभावित हुए। वह उस कब्र पर ले जाने के लिए कहता है जहां लाजर को दफनाया गया है। कब्र के प्रवेश द्वार पर खड़े होकर, यीशु ने ईश्वर से जोर से प्रार्थना की और उसकी प्रार्थना सुनने के लिए उसे धन्यवाद दिया। फिर वह लाजर को बाहर आने का आदेश देता है। उपस्थित लोगों को आश्चर्य हुआ, जब लाजर, जो चार दिन पहले मरा हुआ था, कब्र से बाहर आया, अभी भी दफन कपड़ों में लिपटा हुआ था। जो लोग इस अविश्वसनीय चमत्कार को देखते हैं वे आश्चर्य से भर जाते हैं और यीशु को मसीहा मानने लगते हैं। यह स्वयं मृत्यु पर यीशु की दिव्य शक्ति को प्रदर्शित करता है, उनके स्वयं के पुनरुत्थान का पूर्वाभास देता है। यह ईश्वर के पुत्र और अनन्त जीवन के स्रोत के रूप में यीशु में विश्वास के महत्व को पुष्ट करता है। कहानी यीशु के स्वयं के पुनरुत्थान का पूर्वाभास देती है, जो इस घटना के तुरंत बाद होगा। चमत्कार यीशु की मसीहा, ईश्वर के पुत्र और अनन्त जीवन के दाता के रूप में पहचान की पुष्टि करता है। यह कहानी यीशु की करुणा, मृत्यु पर विजय पाने की उनकी क्षमता और उन पर विश्वास करने वालों के लिए आध्यात्मिक और शाश्वत जीवन के स्रोत के रूप में उनकी भूमिका का एक शक्तिशाली प्रमाण है। यह दुनिया भर के ईसाइयों के लिए प्रेरणा और विश्वास का स्रोत बना हुआ है। यीशु द्वारा लाज़र को मृतकों में से जीवित करने की कहानी – Story of jesus raises lazarus from the dead
विजयादशमी पर ये शुभ कार्य करें,जीवन खुशियों से भर जाएगा, सुख, समृद्धि और धन की होगी बरसात – Do these auspicious things on vijayadashami, life will be filled with happiness, there will be rain of happiness, prosperity and wealth
आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हर साल विजयादशमी का त्योहार हर्षोल्लाह से देश के कोने- कोने में मनाया जाता है। इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने लंकापति रावण का वध कर माता सीता को उनके चंगुल से चंगुल से आजाद करवाया था और इस तरह से अधर्म पर धर्म की जीत हुई थी। तब से हर साल मनाया जाता है ये पावन पर्व। ये एक ऐसा शुभ दिन है जिसमें अगर आप कुछ शुभ कार्य करते हैं तो आपके जीवन में सुख- समृद्धि हमेशा बनी रहेगी। तो चलिए आपको बताते हैं विजयादशमी के दिन किन कामों को करना है माना जाता है शुभ ताकि जीवन से हर अंधकार हो जाए दूर। * रावण दहन का शुभ मुहूर्त: रावण दहन से ही विजयदशमी की पहचान है। अगर आप भी रावण दहन करने वाले हैं तो इसका शुभ मुहूर्त 24 अक्टूबर मंगलवार को शाम 5 बजकर 43 मिनट से शुरू होगा और ढाई घंटे तक रहेगा। * विजयदशमी पर कामों को करना होता है शुभ: दशहरे के दिन नीलकंठ भगवान के दर्शन करना अति शुभ माना जाता है। माना जाता है कि अगर आपको नीलकंठ पक्षी के दर्शन हो जाए तो आपके सारे बिगड़े काम बन जाते हैं। नीलकंठ पक्षी को भगवान का प्रतिनिधि माना गया है। दशहरे पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन होने से पैसे और संपत्ति में बढ़ोतरी होती है। मान्यता ये भी है कि यदि दशहरे के दिन किसी भी समय नीलकंठ दिख जाए तो इससे घर में खुशहाली आती है और जो काम करने जा रहे हैं उसमें सफलता मिलती है। * दान करना है शुभ: दशहरे में दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है अगर आप आर्थिक समस्याओं से गुजर रहे हैं और उससे निजात पाना चाहते हैं तो किसी मंदिर में या साफ-सफाई से जुड़ी किसी भी चीजों में दान करें। इससे धन लाभ होगा और दोगुने की प्राप्ति होगी। * अपराजिता की पूजा: अपराजिता का पौधा एक मात्र ऐसा पौधा है जिसकी अगर विजयादशमी के दिन विधि विधान रूप से पूजा की जाए तो अपने शत्रुओं पर विजय पाया जा सकता है। * शमी के पौधे की पूजा: शमी के पौधे की पूजा करना भी बहुत शुभ होता है। कई बार कुंडली में दोष होने की वजह से हमारे बनते काम बिगड़ जाते हैं। अगर आपके साथ भी कोई ऐसी समस्या है तो विजयादशमी के दिन शमी के पौधे की पूजा जरूर करें। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है।) विजयादशमी पर ये शुभ कार्य करें,जीवन खुशियों से भर जाएगा, सुख, समृद्धि और धन की होगी बरसात – Do these auspicious things on vijayadashami, life will be filled with happiness, there will be rain of happiness, prosperity and wealth
महासप्तमी पर इस विधि से करें मां कालरात्रि की पूजा, प्रसन्न होंगे शनिदेव – Worship maa kalratri with this method on maha saptami, shanidev will be pleased
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। शारदीय नवरात्रि की महासप्तमी 21 अक्टूबर 2023 यानी आज है। ऐसी मान्यता है की मां कालरात्रि वह देवी है जो बुरी शक्तियों का विनाश करती हैं। अगर आपके आसपास भी बुरी शक्तियों का साया है, जीवन में अशुभ हो रहा है तो मां कालरात्रि की विधिवत रूप से पूजा अर्चना करें, मन प्रसन्न हो जाएंगी और काल का साया आपसे हट जाएगा। तो चलिए आपको बताते हैं महासप्तमी पर कैसे करें मां कालरात्रि की पूजा। * मां कालरात्रि की पूजा का मुहूर्त कब है: सही मुहूर्त पर अगर मां कालरात्रि की पूजा की जाए तो आपको इसका लाभ मिल सकता है। इसलिए आपको बता दें की मां कालरात्रि की पूजा का दो मुहूर्त है जिस पर आप माता की पूजा कर सकते हैं। सुबह का मुहूर्त सुबह 6 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा, और अगर रात्रि के मुहूर्त की बात की जाए तो वह 21 अक्टूबर यानी आज रात 11 बजकर 41 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 31 मिनट तक का है। * मां कालरात्रि की पूजा विधि: जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है इसलिए मां कालरात्रि की पूजा अगर रात में की जाए तो वह शुभ माना जाता है। मां कालरात्रि की विधिवत रूप से पूजा अर्चना करने के लिए सबसे पहले माता को कुमकुम का तिलक लगाएं, गुड़हल का फूल चढ़ाएं। फिर माता का प्रिय भोग गुड़ चढ़ाएं। और क्लीं ऐं श्रीं कालिकायै नम: ‘ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐ’ का यथाशक्ति जाप करें। पूजा के समय आपने अगर स्लीप रंग के कपड़े पहने हो तो अच्छा है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है।) महासप्तमी पर इस विधि से करें मां कालरात्रि की पूजा, प्रसन्न होंगे शनिदेव – Worship maa kalratri with this method on maha saptami, shanidev will be pleased
श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी – Shri krishna govind hare murari
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ हे नाथ नारायण…॥ पितु मात स्वामी, सखा हमारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ हे नाथ नारायण…॥ ॥ श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी…॥ बंदी गृह के, तुम अवतारी कही जन्मे, कही पले मुरारी किसी के जाये, किसी के कहाये है अद्भुद, हर बात तिहारी ॥ है अद्भुद, हर बात तिहारी ॥ गोकुल में चमके, मथुरा के तारे हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ पितु मात स्वामी, सखा हमारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ अधर पे बंशी, ह्रदय में राधे बट गए दोनों में, आधे आधे हे राधा नागर, हे भक्त वत्सल सदैव भक्तों के, काम साधे ॥ सदैव भक्तों के, काम साधे ॥ वही गए वही, गए वही गए जहाँ गए पुकारे हे नाथ नारायण वासुदेवा॥ श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ पितु मात स्वामी सखा हमारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ गीता में उपदेश सुनाया धर्म युद्ध को धर्म बताया कर्म तू कर मत रख फल की इच्छा यह सन्देश तुम्ही से पाया अमर है गीता के बोल सारे हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ पितु मात स्वामी सखा हमारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बंधू सखा त्वमेव त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देव देवा ॥ श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी…॥ राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे राधे कृष्णा कृष्णा ॥ राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे राधे कृष्णा कृष्णा ॥ हरी बोल, हरी बोल, हरी बोल, हरी बोल ॥ राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे राधे कृष्णा कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे राधे कृष्णा कृष्णा ॥ श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी – Shri krishna govind hare murari
शांतिनाथ मंदिर का इतिहास – History of shantinath temple
शांतिनाथ मंदिर एक महत्वपूर्ण जैन मंदिर है जो जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों (आध्यात्मिक शिक्षकों) में से एक, भगवान शांतिनाथ को समर्पित है। जैन मंदिर, शांतिनाथ मंदिर की तरह, जैन धर्म के अनुयायियों के लिए पूजा स्थल और तीर्थ स्थान हैं। इनमें विशिष्ट वास्तुशिल्प और कलात्मक तत्व शामिल हैं, जिनमें तीर्थंकरों और अन्य जैन देवताओं की जटिल नक्काशीदार संगमरमर और पत्थर की मूर्तियां शामिल हैं। जैन धर्म एक प्राचीन धर्म है जिसकी जड़ें भारत में हैं। जैन मंदिरों का निर्माण कई शताब्दियों पहले हुआ था, सबसे पुराने जैन मंदिरों को चट्टान की सतहों पर उकेरा गया था। समय के साथ, जैन मंदिर वास्तुकला विकसित हुई, जिसमें विस्तृत संरचनाएं बनाई गईं, जिनमें अलंकृत डिजाइन और विस्तृत कलाकृतियां शामिल थीं। जैन मंदिर तीर्थंकरों को समर्पित हैं, जो जैन धर्म में श्रद्धेय आध्यात्मिक नेता और शिक्षक हैं। प्रत्येक मंदिर में आम तौर पर एक विशिष्ट तीर्थंकर की मूर्ति या छवि स्थापित होती है, और भक्त मंदिर परिसर के भीतर प्रार्थना करते हैं, अनुष्ठान करते हैं और ध्यान में संलग्न होते हैं। जैन मंदिर वास्तुकला अपनी विशिष्ट विशेषताओं के लिए जाना जाता है, जिसमें जटिल नक्काशीदार खंभे, छत और मूर्तियां शामिल हैं। जैन मंदिर निर्माण में उपयोग किए जाने वाले संगमरमर को अक्सर अत्यधिक पॉलिश किया जाता है, जिससे मंदिर चमकदार दिखते हैं। जैन मंदिरों में अक्सर तीर्थंकरों के जीवन की प्रमुख घटनाओं के साथ-साथ जैन स्वस्तिक और जैन प्रतीक चिन्ह जैसे विभिन्न जैन प्रतीकों और रूपांकनों का कलात्मक चित्रण होता है। जैन मंदिर धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र हैं। वे पर्युषण, महावीर जयंती (24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती) और अन्य सहित विभिन्न त्योहारों और समारोहों की मेजबानी करते हैं। प्राचीन मंदिरों सहित कई जैन मंदिरों में उनके स्थापत्य और ऐतिहासिक महत्व की रक्षा के लिए संरक्षण और जीर्णोद्धार के प्रयास किए गए हैं। शांतिनाथ मंदिर का विशिष्ट इतिहास उसके स्थान और उस विशेष मंदिर के बारे में उपलब्ध अभिलेखों पर निर्भर करेगा। यह ध्यान देने योग्य है कि जैन मंदिरों का एक समृद्ध और विविध इतिहास है, और वे जैन धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शांतिनाथ मंदिर का इतिहास – History of shantinath temple
बेथनी में यीशु के अभिषेक की कहानी – The story of the anointing of jesus at bethany
बेथानी में यीशु के अभिषेक की कहानी बाइबिल के नए नियम में एक महत्वपूर्ण प्रकरण है, जो मैथ्यू (मैथ्यू 26:6-13), मार्क (मार्क 14:3-9), और जॉन (जॉन 12) के गॉस्पेल में दिखाई देती है। :1-8). यह एक महिला द्वारा यीशु के प्रति दिखाए गए प्रेम और भक्ति के कृत्य का एक मर्मस्पर्शी विवरण है जिसने यीशु पर महंगे इत्र का अभिषेक किया था। ईसाई धर्म का केंद्रीय व्यक्तित्व, ईसाइयों द्वारा ईश्वर का पुत्र और मसीहा माना जाता है। एक महिला जिसकी पहचान जॉन के गॉस्पेल में मार्था और लाजर की बहन मैरी के रूप में की गई है, लेकिन अन्य खातों में उसका नाम अज्ञात है। भोजन के मेजबान जहां कार्यक्रम होता है, मैथ्यू के सुसमाचार और मार्क के सुसमाचार में “साइमन द लेपर” के रूप में पहचाना जाता है। यीशु को शमौन कोढ़ी के घर भोजन के लिए आमंत्रित किया गया है। भोजन के दौरान, एक महिला उस कमरे में आती है जहाँ यीशु मेज पर लेटे हुए हैं। महिला बहुत महंगे इत्र का एक अलबास्टर जार लाती है, जिसे वह तोड़ती है और अभिषेक के रूप में यीशु के सिर पर डालती है। कुछ वृत्तांतों में, वह उनके पैरों का अभिषेक भी करती है और उन्हें अपने बालों से पोंछती है। यीशु के कुछ शिष्य, विशेष रूप से यहूदा इस्करियोती, आक्रोश व्यक्त करते हैं और महिला के कार्यों पर सवाल उठाते हैं, सुझाव देते हैं कि महंगा इत्र बेचा जा सकता था और पैसा गरीबों को दिया जा सकता था। यीशु ने महिला के कार्यों का बचाव किया, उसकी भक्ति के लिए उसकी सराहना की। वह अपने शिष्यों को बताता है कि उसने उसे दफनाने के लिए उसका अभिषेक किया है, और वह उसके प्रेम और विश्वास के कार्य के महत्व पर प्रकाश डालता है। जॉन के सुसमाचार में, यीशु ने उल्लेख किया है कि महिला के कृत्य का भविष्यसूचक महत्व है, क्योंकि उसने पहले ही दफनाने के लिए उसका अभिषेक कर दिया था। यह महिला द्वारा यीशु के प्रति दिखाए गए गहन प्रेम, भक्ति और बलिदान को दर्शाता है, जो ईसाई धर्म में हार्दिक भक्ति के मूल्य का प्रतीक है। यीशु ने महिला की कार्रवाई को अपनी आसन्न मृत्यु और दफन की मान्यता के रूप में स्वीकार किया, मसीहा के रूप में अपनी पहचान को मजबूत किया जो मानवता के पापों के लिए खुद को बलिदान के रूप में पेश करेगा। कहानी भौतिक चिंताओं (यहूदा द्वारा दर्शाया गया) और आध्यात्मिक मूल्यों (महिला के कार्य द्वारा दर्शाया गया) के बीच तनाव पर भी प्रकाश डालती है। यह भौतिक संपत्ति पर आध्यात्मिक मामलों की प्राथमिकता पर जोर देता है। दफनाने के लिए अभिषिक्त होने के बारे में यीशु का बयान उनके क्रूस पर चढ़ने और दफनाने का पूर्वाभास देता है, जो उनके मिशन के मुक्ति उद्देश्य को रेखांकित करता है। कुल मिलाकर, बेथनी में यीशु के अभिषेक की कहानी सुसमाचार में एक मार्मिक और यादगार क्षण है, जो भक्ति, बलिदान और यीशु के दिव्य मिशन की मान्यता के विषयों को दर्शाती है। यह दुनिया भर के ईसाइयों के लिए चिंतन और प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। बेथनी में यीशु के अभिषेक की कहानी – The story of the anointing of jesus at bethany
जानिए सुख और सौभाग्य की देवी कालरात्रि की पूजा विधि और मंत्र के बारे में – Know about the worship method and mantra of kalratri the goddess of happiness and good fortune
शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन देवी कालरात्रि की पूजा की जाती है। मां दुर्गा के इस स्वरूप को शुभंकरी भी कहा जाता है। यह देवी दुष्टों का विनाश करने और शुभ फल देने के लिए जानी जाती हैं। आपको बता दें कि तीन नेत्रों वाली देवी कालरात्रि की पूजा करने से सारे कष्ट दूर होते हैं। मान्यता है कि भक्त नवरात्रि के सांतवें दिन विधि-विधान से मां कालरात्रि की पूजा करते हैं, तो उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इनकी पूजा करने से डर, भ्रम और रोग दूर होते हैं। * कालरात्रि पूजा विधि: देवी कालरात्रि की पूजा सुबह स्नान करके साफ वस्त्र धारण करके शुरू करनी चाहिए। सबसे पहले मां की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं घी का। फिर उन्हें लाल रंग के फूल, अक्षत, पांच प्रकार के फल, धूप, गंध, पुष्प और गुड़ चढ़ाएं। आपको बता दें कि मां कालरात्रि को गुड़ से बने भोग चढ़ाते हैं तो फिर आपके लिए ज्यादा फलदायी होगा। पूजा समाप्त करने के बाद आप दुर्गा चालीसा या फिर दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करें। इसके अलावा यहां बताए जा रहे मंत्रों का भी जाप करें। * कालरात्रि मंत्र: ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम: ॐ कालरात्र्यै नम: ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐ ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा। * ध्यान मंत्र: एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी। वामपादोल्ल सल्लोहलता कण्टक भूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥ (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है।) जानिए सुख और सौभाग्य की देवी कालरात्रि की पूजा विधि और मंत्र के बारे में – Know about the worship method and mantra of kalratri the goddess of happiness and good fortune
भूलकर भी न चढ़ाएं नवरात्रि में माता रानी को ये चीजें, माना जाता है बेहद अशुभ – Do not offer these things to mata rani even by mistake during navratri, they are considered very inauspicious
नवरात्रि के समय खास योग के कारण मां दुर्गा की अराधना बेहद फलदाई होती है। शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है और 24 अक्टूबर को दशमी के दिन समाप्त होगी। मान्यता है कि नवरात्रि के समय माता धरती पर अवतरित होती हैं और उनके नौ रूपों की पूजा पूरे विधि विधान से की जाती है। इस समय माता को प्रिय चीजों अर्पित करने से माता अत्यंत प्रसन्न होती हैं लेकिन कुछ चीजें देवी की अराधना में वर्जित मानी जाती हैं और उन्हें भूलकर भी देवी को अर्पित नहीं करना चाहिए। # नवरात्रि में माता रानी को क्या नहीं चढ़ाना चाहिए? * तुलसी और दूब है वर्जित: नवरात्रि के दौरान माता की पूजा में भूलकर दूब और तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाना चाहिए। ये दोनों चीजें माता की पूजा में वर्जित मानी जाती है। इसके साथ ही बेल चढ़ाने की भी मनाही होती है। इन चीजों से मां के नाराज होने का भय होता है। * खिले हुए पुष्प करें अर्पित: माता की पूजा में हमेशा पूरी तरह खिले हुए फूलों का ही उपयोग करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार देवी को कमल और चंपा के अलावे किसी भी फूल की कली चढ़ाना वर्जित हैं। नागचंपा, हरसिंगार और मदार के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए। लाल रंग के फूलों से माता सबसे ज्यादा प्रसन्न होती हैं। * बीच में न छोड़े पूजा: नवरात्रि की पूजा में दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा और मंत्रों का जाप करना चाहिए। पूजा के दौरान कभी भी बीच में उठना नहीं चाहिए। ऐसा करने से पूजा निष्फल साबित हो सकती है। * अपवित्र स्थान के फूल: माता की पूजा के लिए कभी भी अपवित्र स्थान से लाए फूलों का उपयोग नहीं करना चाहिए। देवी को नीचे गिरे फूलों को चढ़ाना भी वर्जित माना गया है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है।) भूलकर भी न चढ़ाएं नवरात्रि में माता रानी को ये चीजें, माना जाता है बेहद अशुभ – Do not offer these things to mata rani even by mistake during navratri, they are considered very inauspicious
बाबा गंगाराम आरती – Baba gangaram aarti
जय हो गंगाराम बाबा जय हो गंगाराम। कष्ट निवारण मंगल दायकहो सब सुख के धाम॥ जय हो गंगाराम बाबा…॥ सच्चे मन से ध्यान धरेजो उनके सारो काम। धन-वैभव वह सब सुख पाताजाने जगत तमाम॥ जय हो गंगाराम बाबा…॥ प्रात:काल थारी करां वन्दनालेकर थारो नाम। चन्दन पुष्प चढ़ावा थारेऔर करां प्रणाम॥ जय हो गंगाराम बाबा…॥ रोग शोक काटो थे सबकाबसो झुंझनू धाम। आ मन्दिर जो दर्शन करसीपासी सुख सन्तान। जय हो गंगाराम बाबा…॥ देवलोक में आप विराजो सारेजग में हो महान। जो कोई सुमिरण करे आपकाहो निश्चय कल्याण॥ जय हो गंगाराम बाबा…॥ श्रद्धा भाव जो मन में राखेधरे आपका ध्यान। उसकी रक्षा आप करो नितहो करुणा के धाम। जय हो गंगाराम बाबा…॥ म्हें हां बालक थारा बाबाम्हानै नही कुछ ज्ञान। हाथ जोड़कर विनती करांम्हें हां भोला नादान॥ जय हो गंगाराम बाबा…॥ सुख सम्पत्ति के देने वालेसदा करो कल्याण। भूल-चूक म्हारी माफ करोथे देव बड़े बलवान॥ जय हो गंगाराम बाबा…॥ बाबा गंगाराम आरती – Baba gangaram aarti