औखी घड़ी न देखन देई – Aukhi ghadi na dekhan deyi

औखी घड़ी न देखण देई अपना बिरद समाले,
हाथ दे राखै अपने कौ सास सास प्रतिपाले

प्रभ सिओ लाग रेहो मेरा चीत,
आद अंत प्रभ सदा सहाई, धन हमारा मीत

मन बिलास भए साहिब के अचरज देख बडाई
हर सिमर सिमर आनंद कर नानक प्रभ पूर्ण पैज रखाई।

 

औखी घड़ी न देखन देई – Aukhi ghadi na dekhan deyi